सोच का फर्क ( अक्ल बड़ी या भैंस )
!!!!!!!! सोच का फर्क !!!!!!
---- दोस्तों हमने बहुत बार सुना है की अक्ल बड़ी या भैंस पर इस कहानी को और इस कथन को हम आज तक सही से समझ नहीं पाए समझ पाए होते तो हम कभी किस्मत को और अपनी मेहनत को दोष नहीं दे रहे होते आइए एक कहानी के माध्यम से हम इस कथन को समझते हैं!
एक बड़ी प्यारी बात कही है
--- सफलता तब मिलती हैं जब आपके सपने आपके बहानों से बड़े हो जाते हैं
☑☑☑☑ बहुत समय पहले की बात है एक जंगल में एक ऋषि वह उनके शिष्य रहते थे वह दोनों एक दिन उस जंगल से गुजर रहे थे तभी उन्हें रास्ते में जोर की प्यास लगी तो गुरु ने शिष्य से कहा चलो हम कहीं पानी पी लेते हैं वहीं पास में एक छोटी सी कुटिया थी गुरु और शिष्य उस कुटिया के पास जाते हैं और आवाज लगाते हैं कुटिया के अंदर से एक आदमी ,औरत उसके दो बच्चे निकल कर बाहर आते हैं ,उन्हें देखकर ऐसा लग रहा था मानो वह खुद बहुत गरीब थे शिष्य ने उनसे पानी पिलाने को कहा उस आदमी ने गुरु व शिष्य को पानी पिलाया, और इतने में अंधेरा होने लगा!
गुरु ने उस आदमी से पूछा कि यह तुम्हारा खेत है इसमें कोई फसल क्यों नहीं बो रखी इतने में उस आदमी ने कहा कि हमारे पास एक भैंस है वह दूध देती है जिसमे से हम थोडा दूध को हम बेचते हैं और थोड़े दूध में हमारे घर का गुजारा कर लेते हैं. अंधेरा हो चुका था गुरु ने कहा क्यों ना हम आज की रात यहीं रुकते हैं, गुरु व शिष्य दोनों रात ठहरने के लिए वही रुक जाते हैं आधी रात होने पर गुरु शिष्य के कान में धीरे से कहता है, चलो हम यहां से चलते हैं और साथ में इस आदमी की भैंस को भी ले चलते हैं, शिष्य अचंभित हो चुका था पर गुरु की आज्ञा थी वह उन्हें इंकार भी नहीं कर सकता था जैसा गुरु ने कहा शिष्य ने उस भैस को भी अपने साथ ले लिया और बहुत आगे जंगल में जाकर छोड़ दिया, जहां से वह भैंस फिर वापस ना आ सके!
और गुरु व शिष्य आगे बढ़े यही बात शिष्य के मन में रह गई ऐसे ही कुछ वर्ष बीत गए पर शिष्य को उस बात का बोध था, शिष्य ने सोचा क्यों ना मैं उस गरीब आदमी की मदद करूं और यही सोचकर शिष्य जो कि अब स्वयं एक गुरु बन चुका था. वह पुनः उसी स्थान पर आता है जहां से उन्होंने पानी पिया था और वहां आ कर देखता है तो अचंभित हो जाता है वहां देखता है वहीं आस-पास बहुत बड़े-बड़े वृक्ष लगे हुए हैं और एक बहुत बड़ा घर बना हुआ है इतने में वह सोचता है कि उसकी भैस जाने के बाद वह लोग शायद यह जमीन बेचकर कहीं और जगह चले गए हो. और वह वहां से जाने लगता है इतने में उसे वही आदमी नजर आता है और वह गुरु ,आदमी से कहता है की तुमने शायद मुझे पहचाना नहीं है मैं बहुत वर्ष पहले अपने गुरु के साथ यहां आया था , इतने में वह आदमी कहता है कि हां मैं जानता हूं आपको आपके जाने के बाद उसी दिन मेरी भैस भी कही चली गई उसके बाद मैंने अपने परिवार के पालन पोषण के लिए लकड़ियां काटकर बेचने लगा और धीरे-धीरे कुछ पैसे इकट्ठे किए उसके बाद मैंने अपनी जमीन को जोतना शुरू किया ,और मुझे बहुत अच्छा परिणाम मिला. बहुत अच्छी फसलें हुई और मैंने धीरे-धीरे यहां बगीचे लगा दिए आज मैं पूरी मेहनत करता हूं और अपने परिवार का पालन पोषण भी अच्छे से करता हूं ! यहां आस-पास के 1000 गांव में मैं सबसे बड़ा व्यापारी हूं ,यह बात सुनकर वह गुरु अचंभित हो जाता है ! और उसे अपने गुरु की बात का पूरा ज्ञान हो जाता है !!
कहानी की सीख ------
1 . दोस्तों इस कहानी से हम यही समझ सकते हैं कि हम जीवन में कितना बड़ा कर सकते हैं अगर हमारी सोच को हम बड़ा कर ले तो.
अगर उस दिन वह गुरु उस भैंस को नहीं ले जाते तो वह गरीब आदमी हमेशा गरीब ही बना रहता, वह कभी अपनी मेहनत को नहीं पहचान सकता था. और कभी भी इतना बड़ा आदमी नहीं बन सकता था
आज हम सभी यही सोचते हैं कि जितना किस्मत में लिखा उतना मुझे मिला है पर ऐसा नहीं है अगर हम मेहनत करें अपने आराम को छोड़ें तो हम बहुत आगे बढ़ सकते हैं और अपने जीवन में अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं
2. दोस्तों यह केवल एक कहानियां नहीं है यह कहानियां हमें सत्य का बोध कराती कि हां हम कितना कुछ कर सकते हैं केवल आप इस कहानी को पढ़कर यहीं भूलना चाहते हैं, तो आगे से कभी ऐसी कहानी कभी इस पेज पर मत आईऐगा, क्योंकि हमारा मकसदआपका वक्त खराब करना नहीं है आप यहां से कुछ सीखें और उसे अपने जीवन में अमल में ले यही हमारी कोशिश है !!
एक बड़ी प्यारी बात कही है
!!!! सफर से मत डर ऐ मुसाफिर किसी का अंत खूबसूरत है तो किसी की शुरुआत!!!!
ऐसी ही प्रेरणादायक कहानियों के लिए आप हमारे साथ बने रहे
धन्यवाद
हम से संपर्क करने के लिए
Email address - patidarvikki04@gmail.com
Contact 8966856736 (what's app)


Comments
Post a Comment